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अब लोकसभा चुनाव में बेनीवाल भाजपा का समर्थन करेंगे।

अब लोकसभा चुनाव में बेनीवाल भाजपा का समर्थन करेंगे।


विधानसभा चुनाव में बेनीवाल की पार्टी को मिले 9 लाख वोट, जबकि कांग्रेस को भाजपा से मात्र एक लाख 86 हजार वोट ज्यादा मिले थे। अब बेनीवाल भी मोदी को पीएम बनवाएंगे। हनुमान बेनीवाल के एनडीए में आने से वसुंधरा राजे और सचिन पायलट को झटका।
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 यानि अब लोकसभा चुनाव में बेनीवाल भाजपा का समर्थन करेंगे।4 अप्रैल को राजस्थान के जाट समुदाय के दबंग नेता हनुमान बेनीवाल ने अपनी आरएलपी को एनडीए में शामिल करने की घोषणा की। इसकी एवज में भाजपा एक-दो संसदीय क्षेत्रों में आरएलपी के उम्मीदवारों का समर्थन करेंगी।  लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद नरेन्द्र मोदी को ही प्रधानमंत्री बनवाने के लिए बेनीवाल से समझौता किया है।हालांकि राजस्थान में भाजपा मजबूत स्थिति में है, एनडीए में शामिल होने के बाद बेनीवाल ने भी कहा कि अब वे पूरी ताकत लगाकर मोदी को प्रधानमंत्री बनवाएंगे। असल में लोकसभा चुनाव में बेनीवाल का इसलिए महत्व हो गया कि विधानसभा चुनाव में बेनीवाल की पार्टी के उम्मीदवारों को कोई 9 लाख वोट प्राप्त हुए जो कुल मतदान का करीब तीन प्रतिशत माना जा रहा है। हालांकि परिणाम के बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस को भाजपा के मुकाबले मात्र एक लाख 86 हजार वोट ज्यादा मिले। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मात देने के लिए ही भाजपा ने बेनीवाल से समझौता किया। बेनीवाल स्वयं भी खींवसर से विधायक हैं, जबकि मेड़ता और जोधपुर के भोपालगढ़ में आरएलपी के विधायक हैं। माना जा रहा है कि बेनीवाल के समर्थन से राजस्थान के नागौर, बाड़मेर, जोधपुर, पाली आदि संसदीय क्षेत्रों में भाजपा को फायदा होगा।
वसुंधरा राजे को झटका:
बेनीवाल का समर्थन भाजपा की राजनीति में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को तगड़ा झटका है। सूत्रों की माने तो राजे इस पक्ष में नहीं थीं कि बेनीवाल का समर्थन लिया जाए। लेकिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रकाश चंद और निम्बाराम की भूमिका की वजह से राजे के विरोध को दरकिनार कर दिया गया। माना जा रहा है कि अब भाजपा की राजनीति में वसुंधरा राजे दिन लद गए हैं। जिन राजे ने सीएम रहते कईयों को नौकरी से निकलवाया, अब वो स्वयं अपनी पार्टी में अप्रसांगिक हो गई हैं। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का दायित्व होने के बाद भी राजे की लोकसभा चुनाव में कोई राय नहीं मानी जा रही है। लोगों की बददुओं से राजे को भारी खामियाजा उठाना पड़ रहा है, लेकिन फिर भी राजे का घमंड चूर नहीं हो रहा है। असल में राजे ने अपने इर्द-गिर्द अभी भी उन्हीं चाटुकारों को नियुक्त कर रखा है जिन्होंने भाजपा के शासन में सत्ता की मलाई जमकर खाई। ऐसे चाटुकारों ने ही राजे की नैया को डूबोया है। यदि विधानसभा चुनाव से पूर्व राजे को सीएम पद से हटा दिया जाता तो राजस्थान में भाजपा की सरकार फिर से बन सकती थी। बदली हुई परिस्थितियों में राजे न तो राष्ट्रीय और न प्रदेश की राजनीति में कोई भूमिका निभा रही हैं। भाजपा जितना जल्दी राजे से पीछा छुड़ाएगी, उतना फायदा भाजपा को होगा।
सचिन पायलट को भी झटका:
बेनीवाल द्वारा एनडीए को समर्थन देने से कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट को भी झटका लगा है। बेनीवाल की राजनीतिक ताकत को समझते हुए गत दिनों ही सीएम अशोक गहलोत न कोई दो घंटे तक बेनीवाल से मुलाकात की थी। गहलोत चाहते थे कि बेनीवाल कांग्रेस में शामिल हों या फिर यूपीए को समर्थन दें। लेकिन गहलोत के प्रयासों पर डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने पानी फेर दिया। पायलट ने बेनीवाल के समर्थन का कड़ा विरोध किया। पायलट का कहना था कि विधानसभा चुनाव में बेनीवाल की पार्टी के उम्मीदवारों की वजह से कांग्रेस को कई स्थानों पर हार का सामना करना पड़ा। पायलट ने उदाहरण दिया कि नागौर से कांग्रेस प्रत्याशी हबीबुर्ररहमान इसलिए हारे। बेनीवाल का समर्थन लिया जाता है तो कांग्रेस को नुकसान होगा। पायलट के समर्थकों ने हाईकमान तक यह बात भी पहुंचाई कि अशोक गहलोत अपने बेटे वैभव गहलोत को जोधपुर से जीतवाने के लिए बेनीवाल के साथ समझौता कर रहे हैं। जोधपुर संसदीय क्षेत्र में भी जाट समुदाय की संख्या काफी है। पायलट खेमे के ऐसे आरोपों के चलते गहलोत ने बेनीवाल को खुला छोड़ा दिया। सब जानते हैं कि गहलोत जिस व्यक्ति से एक बार बात कर लें फिर वह उन्हीं का मुरीद हो जाता है। कांग्रेस की अंदरुनी राजनीति की वजह से गहलोत को पीछे हटना पड़ा। अब जब बेनीवाल ने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा कर दी है, तब पायलट और उनके समर्थक चारों खाने चित हो गए हैं। पायलट के समर्थक इस बात से खुश हो सकते हैं कि अब जोधपुर से गहलोत के पुत्र वैभव की जीत कठिन हो गई है। देखना होगा कि पायलट की इस तिकड़म को राहुल गांधी किस तरह लेते हैं। 

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